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Heart Failure Causes, Symptoms, and Treatment

Heart Failure Causes, Symptoms, and Treatment

Heart Failure Introduction

हार्ट फेलियर (Heart Failure) एक साइंटिफिक टर्म है, जिसका अर्थ है कि हार्ट नोर्मल से कम क्षमता पर काम कर रहा है। हार्ट की कुछ पम्पिंग क्षमता होती है, हार्ट एक प्रकार का पंप होता है जो ब्लड लेता है, फिर उस ब्लड को लंग्स के द्वारा प्यूरीफाई करवाकर यह ब्लड ऑक्सीजनटेड फॉर्म में फिर हार्ट में आता है, और हार्ट इस ब्लड को बॉडी को भेजता है। यह ब्लड शरीर के ऑर्गन्स को प्राप्त होता है, जिससे बॉडी के ऑर्गन्स कार्य करते है।

हार्ट की कुछ पम्पिंग क्षमता होती है, जिसे साइंटिफिक लैंग्वेज में इजेक्शन फ्रैक्शन (Ejection fraction) कहते है। जब यह इजेक्शन फ्रैक्शन किसी कारणवश सामान्य से महत्वपूर्ण रूप से कम हो जाता है, तो पेशेंट को हार्ट फेलियर के पेशेंट की श्रेणी में डाल दिया जाता है।

Congestive Heart Failure (कंजेस्टिव हार्ट फेलियर )

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (Congestive Heart Failure) वह स्थिति है जिसमे रोगी के हार्ट की कार्य करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है, उसका सामान्य स्थिति में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है, फेफड़ों और पैरों में तरल पदार्थ भरने लगता है। और इस स्थिति में डॉक्टरों के पास (आई. ए. बी. पी) मशीन (IABP Machine) पर कुछ समय तक मरीज़ को रखने के अतरिक्त LVAD मशीन को इम्प्लांट करने और हार्ट ट्रांसप्लांट (Heart Transplant) करने जैसे दो ही विकल्प शेष रहते है, जिसे डेस्टिनेशन ट्रीटमेंट कहा जाता है। समय रहते इन मरीज़ों का उपचार ना होने पे मरीज़ के जान जा सकती है, ऐसे मरीज़ को जीवन बहुत काम होता है, समय रहते डेस्टिनेशन ट्रीटमेंट नहीं होने पर इन्हे बचाना बहुत मुश्किल होता है।

मेडिकल साइंस के अनुसार हृदय की मांसपेशियाँ अदूरदर्शी होती हैं, इनका एक बार क्षतिग्रस्त होने पर दुबारा से ठीक होना नामुमकिन है, इसे केवल दवाओं, उपकरणों और जीवनशैली में बदलाव से मैनेज किया जा सकता है और मरीज़ के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

हार्ट फेलियर होने के मुख्य कारण (Main Causes of Heart Failure)

इजेक्शन फ्रैक्शन (Ejection Fraction) कम होने के और हार्ट फेलियर (Heart Failure) होने के मुख्य कारण होते है।

  1. सबसे मुख्य कारण है Heart attack (हृदय घात ) की वजह से मरीज़ो की हृदय की पम्पिंग क्षमता कम हो जाती है।
  2. लम्बे समय तक अल्कोहल (alcohol) के सेवन से भी हृदय की माँसपेशिया कमजोर पड़ जाती है, और हृदय की पम्पिंग क्षमता कम हो सकती है।
  3. कुछ इन्फेक्शन या वायरस जैसे: एच 1एन 1 (H1N1), कोविड़-19 (Covid-19) के संक्रमण और कुछ वायरल इलनेस और वायरल निमोनिया होने के बाद हृदय की पम्पिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिसको हम मायोकार्डिटिस बोलते है, और इसकी वजह से भी इजेक्शन फ्रैक्शन कम होता है, और पेशेंट हार्ट फेलियर में जा सकता है।
  4. पेरिपार्टियम कार्डियोमायोपैथी (Peripartum Cardiomyopathy) एक प्रकार की हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी होती है, जिसमे महिलाओं में डेलिवेरी होने के एक महीने पहले या पांच महीने बाद तक उनकी जो हार्ट की माँसपेशिया होती है वह किसी-किसी में कमजोर हो जाती है। और इन पेशेंट्स को हार्ट फेलियर हो जाता है।
  5. डायबिटिक पेशेंट्स में भी डायबिटिक कार्डियोमायोपैथी नाम की बीमारी हो सकती है, जिसमे हृदय की मांसपेशिया कमजोर हो जाती है, और मरीज़ का हार्ट फेलियर में जा सकता है।
  6. कुछ दवाओं का लम्बे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के प्रयोग करना भी हार्ट फेलियर का कारण बन सकता है। जिसमे एंटी फंगल दवाएं (Anti-fungal medicines), नॉन स्टेरोडिअल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs), एंटी डायबिटिक मेडिकेशन (Anti-Diabetic Medication), एंटी डेप्रेस्सेंट (Anti-Depressants), कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स (Calcium channel Blocker) ।

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हार्ट फेलियर के प्रमुख लक्षण (Main Symptoms of Heart Failure)

  1. हार्ट फेलियर के पेशेंट्स का नार्मल काम करने में भी सांस फूलने लगता है।
  2. सीधे लेटने में सांस ज्यादा फूलता है, और बैठने में इन्हे आराम मिलता है।
  3. हार्ट फेलियर के पेशेंट्स के बहुत जल्दी थकान हो जाती है, और साथ-साथ इन्हे भूख की भी कमी हो जाती है, क्यूंकि हार्ट की पम्पिंग कम होने की वजह से इनकी आँतों में सूजन रहती है, और इस कारण ऐसे पेशेंट्स को भूख बहुत कम लगती है।
  4. हार्ट फेलियर के लक्षणों में पल्पिटेशन जिसमे (हार्ट की धड़कन सामान्य से बहुत तेज़ हो जाती है, और जटिल होकर इनको वेंट्रिकुलर Tachycardia की बीमारी भी हो सकती है, जो जानलेवा हो सकती है।
  5. हार्ट फेलियर के मरीज़ों की स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर फेफड़ों और शरीर में तरल पदार्थ भरने लग जाता है, क्यूंकि हार्ट को जो ब्लड किडनी को पहुंचना है वो वह ब्लड किडनी को नही पंहुचा पाता जिससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाता है, और किडनी को जिस तरल पदार्थ को फ़िल्टर करके शरीर के बहार भेजना होता है, वह शरीर के अंदर ही रह जाता है और फेफड़ो और पैरों में तरल पदार्थ भर जाता है।

अगर मरीज़ ऊपर दिए गए लक्षण महसूस करता है, तो उस समय रहते अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेके अपना उपचार अतिशीघ्र शुरू करा देना चाहिए।

आज हार्ट फेलियर के मरीज़ों के लिए ऐसी दवाएं और उपचार पद्दतियाँ उपलब्ध जिससे मरीज़ को लम्बा जीवन दिया जा सकता है, उसके जीवन का स्तर भी सुधारा जा सकता है। इसके अतरिक्त मेडिकल साइंस में कुछ devices प्रत्यारोपित की जाती है, जिनमे CRT पेसमेकर, LVAD प्रमुख है, जिनकी मदद से मरीज़ को लम्बा और बेहतर जीवन दिया जा सकता है।

हार्ट फेलियर का उपचार (Heart Failure Treatment)

यहाँ पर हार्ट फेलियर के मरीज़ों के लिए सहायक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्दतियाँ (Helpful Ayurvedic Medicines for Heart Failure Patients) के बारे में बताया गया है।

हार्ट फेलियर के मरीज़ो के लिए सहायक उपचार पद्दति जिससे मरीज़ के जीवन को बेहतर बना उसे लम्बा जीवन दिया जा सके, जिसे मैंने अपने हार्ट फेलियर के मरीज़ों पर अपनाया और उनके जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया इससे उन्हें भी लाभ हुआ कुछ इस प्रकार की चिकित्सा पद्दतियों को आपसे साझा कर रहा हूँ, यह सभी चिकित्सा पद्दतियाँ आयुर्वेदिक है।

अर्जुन की छाल का काढ़ा (Decoction of Arjuna Bark)

क्षीरपाक विधि से तैयार करके अर्जुन की छाल का काढ़ा सुबह शाम 250 ML ले। इससे खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है, खून का गाढ़ापन काम होता है और हृदय की मांसपेशियों को बल प्राप्त होता है।

काढ़ा बनाने की विधि

रात को 250 ml पानी में 5 gm (1 Teaspoon) ग्राम अर्जुन की छाल का पाउडर डालकर के भीगों दे, सुबह इस पानी में बराबर मात्रा 250 ml दूध मिलाके इसे मंदी आंच पे पानी के उबलने और दूध के शेष रह जाने तक उबाले फिर इसे ठंडा कर चाय की जगह पर इसका सेवन करे। यही प्रक्रिया शाम के लिए करें। सुबह खाली पेट और शाम को सोने से पहले दो बार इस काढ़े का सेवन करने से लाभ होता है।

जवाहरमोहरा वटी, प्रभाकर वटी, अकीक पिष्टी (Jawaharmohra Vati, Prabhakar Vati, Akik Pishti)

जवाहर मोहरा वटी, प्रभाकर वटी, अकीक पिष्टी तीनो दवाओं को इस अनुपात में ले।

जवाहर मोहरा वटी 1 गोली 125  mg

प्रभाकर वटी 2 गोली 250-250 mg

अकीक पिष्टी 250 mg

इन तीनो दवाओं को मिश्रित कर के खरल में पीस ले और ऊपर दिए गए अनुपात के अनुसार पुड़िया (यह पुड़िया दिए गए अनुपात में आपके लिए आयुर्वेदिक स्टोर वाले आपके लिए तैयार कर देंगे ) बना ले और सुबह शाम एक-एक पुड़िया शहद, मक्खन, अथवा मलाई के साथ सेवन करें।

डायबिटीज के मरीज़ भी पुराने शहद के साथ इस दवा का सेवन कर सकते है।

अच्छी दिनचर्या , व्यायाम, पौष्टिक और कम वसा वाले भोजन के सेवन, और तनावरहित जीवन से आप अपने हृदय को स्वस्थ रख सकते है।

“मैं आपके स्वस्थ्य हृदय और लम्बे जीवन की कामना करता हो ।”

लेखक : डॉ अनिल कुमार शर्मा, भूतपूर्व अतरिक्त निदेशक आयुर्वेद विभाग राजस्थान।

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